मंगलवार, 23 दिसंबर 2008

नजर अव नीर नहीं रखती

मुहब्बत अब
हीर नही रखती
गजल अब
मीर नही रखती
जठर की आग से
भाप बन उड गया
नज़र अब
नीर नहीं रखती
दौलते फ़रेब
साथ हो तो आना
राजनीति अब
फ़कीर नही रखती
भीष्म सोये है
बारुद के ढेर पर
सियासत अब
तीर नही रखती
हरण क्या करेगा
दुर्योधन बेबस
द्रोपदी अब
चीर नही रखती
सभी कुटिया में
आमंत्रित है सादर
सीता अब
लकीर नही रखती
लिफ्ट पर आसक्त
भूली सीढी दर सीढी
नई उमर अब
धीर नहीं रखती
नि:शब्द कत्ल होती
चौराहे पर
इंसानियत अब
पीर नही रखती

सोमवार, 8 दिसंबर 2008


चिकनी त्वचा बदन कसीला
चाम स्पर्श पर शोर मचावे
एक अटारी ठाडे रह कर
सारे जग को नाच नचावे
का सखी अबला ?
ना सखी तबला ।

मंगलवार, 2 दिसंबर 2008

अब न धड़कता दिल मेरा

अब न
मचलता दिल मेरा
अब न
धड़कता दिल मेरा
एक निशा
झोली में डाले
भोर से पहले
विदा हुए
क्षितिज पथ,
अनहद प्रतीक्षा
नयन सावन एक हुए
साँस आखरी,
वंदे मातरम
उल्लासित मन
क्षत विक्षित तन
रक्त श्वेद श्रृंगार धरे
धूल धरा तुम एक हुए
आज गर्व से मस्तक ऊँचा
पर नही शेष कुछ जीने में
जिस पत्थर से
चूड़ी तोडी
उसे रख लिया सीने में
अब न
धड़कता दिल मेरा
अब न
मचलता दिल
.
विनय के जोशी


भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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