अब न
मचलता दिल मेरा
अब न
धड़कता दिल मेरा
एक निशा
झोली में डाले
भोर से पहले
विदा हुए
क्षितिज पथ,
अनहद प्रतीक्षा
नयन सावन एक हुए
साँस आखरी,
वंदे मातरम
उल्लासित मन
क्षत विक्षित तन
रक्त श्वेद श्रृंगार धरे
धूल धरा तुम एक हुए
आज गर्व से मस्तक ऊँचा
पर नही शेष कुछ जीने में
जिस पत्थर से
चूड़ी तोडी
उसे रख लिया सीने में
अब न
धड़कता दिल मेरा
अब न
मचलता दिल
.
विनय के जोशी