गुरुवार, 12 मार्च 2009

गुरुवे नमः


कहाँ से आते चन्दा मामा
कैसे उगते रात सितारे
फल पेडों पर कैसे लगते
पेड़ खड़े है बिना सहारे
पश्चिम सारा लाल हो गया
काली अंधियारी रात फैली
छोटा सा मन बुझ ना पाता
सब कुछ लगता एक पहेली
विद्यालय में आते जैसे
जादू सारा समझ में आता
सहज सरल उदाहरण देकर
शिक्षक सारे भेद बताता
जो सूरज आकाश ना उगता
क्या हालत नजरों की होती
दृष्टी देते मात-पिता और
गुरु देते आँखों को ज्योति

1 टिप्पणी:

संगीता पुरी ने कहा…

बहुत सुंदर लिखा...



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

Internationalized Domain Names

Internationalized Domain Names