मंगलवार, 26 जनवरी 2010

दिनकर कभी अस्त नहीं होता


मौज का महल ध्वस्त नहीं होता
नूरे मुन्तजिर पस्त नहीं होता

शब् धरती की अपनी करनी है
दिनकर कभी अस्त नहीं होता

ज़ुल्म कही भी हो व्यथित होता है
सुखनवर कभी व्यस्त नहीं होता

झुकता रहा सज़दे में हरबार मगर
कही सर तो कही दस्त नहीं होता

फकीरी नहीं होती हमसफ़र जिसकी
शाह होता है मगर मस्त नहीं होता

बेतरतीब अश'आर पेश है, हर कोई
वियाकरण का अभ्यस्त नहीं होता

लती मतलबी


ईश्वर को
ऊँगली दिखाता
व्योम छिद्रान्वेषी
टावर,
प्रतिपल बताता
मौसम की जानकारी
चाँद पर पानी के सबूत
भूकंप,
सूनामी,
बवंडर के जमाखर्च
सास बहु के झगड़ों की
पेचीदगियां और तफसील,
बोरवेल में फसे बच्चों के
जिंदगी और मौत के
टूर्नामेंट की लाइव कवरेज,
जनप्रतिनिधियों में
रुस्तम ए हिंद
दंगल के दांवपेंच,
रजत पटल की कालिख,
जांच कमिशनों का
भाषण चाटण ठठ्ठा,
शेर बाज़ार का सट्टा,
तेजी मंदी के आनंदी,
भालू और नंदी
कुछ भी ना छूटा

उसकी पकड़ से,
बस छूट गए
ढीले होते पेच और
जड़ों में लगी जंग के
समाचार,
और एक रात
भरभरा कर गिर पडा,
झोंपड़पट्टी के
कुछ लोग दब कर मर गए,

लती चिल्ला उठे,
अरे! क्या हुआ ?
कंहा गए सिगनल ?
बिग बोस के घर से
कौन हुआ बेघर ?


भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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