बुधवार, 11 अप्रैल 2012

माँ कभी बीमार नही होती

माँ कभी बीमार नही होती

क्या पता
सोती भी है या नही ,
जब मैं सोता ,
वह जगी होती ,
जब मैं जगता , वह
झाडू - पानी -सफाई कर ,
फूंकनी ले ,
चुल्हे के पडौस में
बैठी होती ,
कभी घट्टी पर ,
कभी गौशाला में ,
माटी में गोबर गूंथ,
दीवारों पर
खजूर बनाती,
गुदडियों को सुई चुभोती ,
ढिबरी में तेल भर
उजाला करती ,
दिन भर
कुछ ना कुछ करती ही रहती ,
मुझे बुखार आता ,
दद्दू खटियां पर पडे रहते ,
बाबा खांसते- खांसते दुहरा जाते....
पर , पर माँ कभी बीमार नही होती
फिर भी.........
फिर भी ना जाने
जल्दी .....
मर क्यूं जाती है ?

विनय के जोषी

3 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

BAHUT HI BADHIYA
....
RAJNEESH

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' ने कहा…

अच्‍छी प्रस्‍तुति...बहुत बहुत बधाई...

कविता रावत ने कहा…

Maa ko bimar to sara ghar bimar....
sabki chinta jo rahti hai..
...Maa ko saakar kar diya aapne..aabhar!



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