रविवार, 6 जून 2021

आसमान सौप दिया

 पहले हथेली  में  मेरे  गुलाब रोप  दिया,

फिर  गले  मिलते  ही  छुरा  घोप दिया।


छुआ  भर था,  मेहंदी  को  एक  शाम,

उम्र  भर के  लिए  सिंदूर  थोप  दिया।


अर्पण कर दिए जब दोनों पंख तुम्हे,

बदले में  तुमने आसमान सौंप दिया।


चाही जो रियायत सांसों  के मूल्य में,

मुस्करा के एक नया  करारोप दिया ।


माँगा जो इलाज दिल  की लगी का,

दर्दे दिल का एक नया प्रकोप दिया।


कट  गया  जब  नीम   आँगन  का।

धूम से पौधा  तुलसी का रोप दिया।


विनय के.जोशी

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भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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