बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

1411


दो पगी
दोगला जीव
दाही दुश्मन
जंगल का.
स्वार्थी - स्वच्छंदी
स्वघाती अपने
मंगल का.
जमीं पर जमा दिए,
भू से भुवन तक,
कंक्रीटी-गजराज भसूँडे.
धरा धमकाती
वनराज समंदर में
आंशियाँ ढूंढे.

1 टिप्पणी:

manmohan ने कहा…

excellent
manmohan



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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