मोर पपिहा खेजडी, करता रहा तलाश ।
धीरे धीरे मिट गया, बादल एक आकाश।।
.
टपटप टपके टापरा, पिया गये परडेर ।
बरखा से काली पडी, नजर कूप मुण्डेर।।
.
पूरनमासी शरद की, अमी पयस बरसात ।
अंक यामिनी गुलमुहर, झुलसा सारी रात।।
.
असली सूरत लापता, मुह खोटे अनगीन।
जैसा ओसर सामने, मुखडे पर धर लीन।।
.
हेम रजत झंकार नित, गूंजे जाके कान।
गाली सी वाको लगे, आरती अरु अजान।।
.
अंधियारा मावस भरा, रोशन बिन्दु प्रहार।
अभिकर्ता जुगनू हुए , चंदा करे व्यापार।
,
विनय के जोशी
4 टिप्पणियां:
दीपावली के पावन पर्व पर आपको हार्दिक बधाई!
बहुत सुंदर कविताएँ हैं आपकी । और क्षणिकाएँ तो बेहद पसंद आईं ।
आपको भी दीपावली का पर्न और नया वर्ष शुभ सुंदर और उन्नती दायक हो .
पूरनमासी शरद की, अमी पयस बरसात ।
अंक यामिनी गुलमुहर, झुलसा सारी रात।।
.
"great composition very touching"
Regards
shabdoN ki sadbhaavna, bhaavoN ka vistaar , mn.bhaavan dohaavalee,
uttam nek vichaar.
sabhi dohe prabhaavshaali haiN.
badhaaee . . .
---MUFLIS---
एक टिप्पणी भेजें