रविवार, 1 फ़रवरी 2009

बसंत आमन्त्रण


कानन कुण्डल घूंघर बाल
ताम्ब कपोल मदनी चाल
मन बसंत तन ज्वाला
नजर डगर डोरे लाल ।

पनघट पथ ठाडे पिया
अरण्य नाद धडके जिया
तन तृण तरंगित हुआ
करतल मुख ओढ लिया ।

आनन सुर्ख मन हरा
उर में आनंद भरा
पलकों के पग कांपे
घूंघट पट रजत झरा ।

चितवन ने चोरी करी
चक्षु ने चुगली करी
पग अंगुठा मोड लिया
अधरों पर उंगली धरी ।

कंत कांता चिबुक छुई
पूछी जो बात नई
जिव्हा तो मूक भई
देह न्यौता बोल गई ।

कोई टिप्पणी नहीं:



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

Internationalized Domain Names

Internationalized Domain Names