मंगलवार, 27 जनवरी 2009

अश्रु सिंचन

भूकंप
जो पिछले दिनों
आया था शहर में
कुछ ज्यादा ही
जोर से था
मैं तो जलजले की
अभ्यस्त थी पर
मकान में दरारे आ गई
कुछ दिनों बाद
एक कारीगर बुलाया
और मरम्मत करवा दी
जाते-जाते उसने कहा .....
दरारों मे भरी सीमेंट की
तराई करना |
पानी की धार को
सीमेंट ने
एकदम सोंख लिया
मुझे अपने
शहीद बेटे का
पहला दूध पीना
याद आ गया |
फिर तराई के लिए
पानी की जरुरत न रही |

2 टिप्‍पणियां:

बेनामी ने कहा…

bahut jyaada bhavuk kavita
man ko chhu gai
manoj

बेनामी ने कहा…

वाह! वाह! आंसू छलक पड़े
नीरज



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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