सच राघव का रूप है
सच गोपाला गाँव,
जांके हिरदे सच बसा
तीरथ वांके पाँव |
सोमवार, 28 जुलाई 2008
जीवन
भीख में मिला एक वस्त्र जिसमे धोखों के धागों से टीसों के टांके लगे हैं जख्मों से भरी जेब और तन्हाईयों के तमगे लगे है फ़िर भी अनमोल है यह समझ मेरी कीमत न इसकी आंक पाती है क्यूंकि कभी कभी नजर उनकी सुई सी चुभती हुई सुख का एक बटन टांक जाती है |
1 टिप्पणी:
बेनामी
ने कहा…
bhut khub likha hai. jari rhe. aap apna word verification hata le taki humko tipani dene me aasani ho.
1 टिप्पणी:
bhut khub likha hai. jari rhe.
aap apna word verification hata le taki humko tipani dene me aasani ho.
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