दैनिक भास्कर रसरंग २९/०६/२००८ को प्रकशित
विस्तार संकुचन
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कभी गोलू कभी गोटली
कभी पोलू कभी पोटली
कभी बिट्टू कभी किट्टू
कभी पठ्ठा कभी पप्पू
कह कर उसे बुलाता
और वह हर बार
हां पापा !
कह कर दौडा आता
और अब
कभी फादर कभी पापा
कभी ओल्डी कभी डैडी
कभी बाऊसा कभी बापू
कभी काकू कभी दादू
कह कर मुझे बुलाता
और मैं हर बार
हां बेटा !
कह कर दौडा आता
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