शनिवार, 26 जुलाई 2008

विस्तार संकुचन दैनिक भास्कर रसरंग २९/०६/२००८ को प्रकशित

दैनिक भास्कर रसरंग २९/०६/२००८ को प्रकशित

विस्तार संकुचन

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कभी गोलू कभी गोटली

कभी पोलू कभी पोटली

कभी बिट्टू कभी किट्टू

कभी पठ्ठा कभी पप्पू

कह कर उसे बुलाता

और वह हर बार

हां पापा !

कह कर दौडा आता

और अब

कभी फादर कभी पापा

कभी ओल्डी कभी डैडी

कभी बाऊसा कभी बापू

कभी काकू कभी दादू

कह कर मुझे बुलाता

और मैं हर बार

हां बेटा !

कह कर दौडा आता

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भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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