बुधवार, 16 जुलाई 2008

बिजली पर कुछ क्षणिकाएँ :-
(१)
शतप्रतिशत
विद्युतीकरण
की प्राप्ति में
छोटी सी कमी
सरकार को
खली न थी
तार था
खम्भा था
बल्ब था
बिजली न थी
(२)
महाभारत
की कथा में
अचानक
सभी भक्तों की
खुशियाँ चली गई
चीर हरण के
दृश्य से पहले
बिजली चली गई
(३)
बिजली के जलते
बल्ब को देखो
कही खुशियाँ
एक स्विच की
मोहताज तो नही ?
(४)
केवल बिजली ही
काफी नही
रोशनी के लिए
अभय भी चाहिए
गुलेल और कंकर से
(५)
एकाकार
राजनीति और बाहुबली
मानों
करंट और बिजली-
.
विनय के जोशी

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भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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