शनिवार, 2 अगस्त 2008

साथी

आग लगी थी
दिल में
आँसू चला
बुझाने को
अधरों तक
आया तो
सिसकी ने कहा
मैं भी साथ चलती हूँ

3 टिप्‍पणियां:

परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत संवेदना भरी रचना है।बहुत बढिया।

Vinay ने कहा…

संक्षिप्त किन्तु भाव विशाल है!

Rujuta........ ने कहा…

WONDERFUL...you have explained a lot with little words...



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

Internationalized Domain Names

Internationalized Domain Names