हुबहू जिस्म जैसी
मशीन बनाना
जटिल और खर्चीला था
इसलिए जिस्म को ही
मशीन बनाना
तय किया गया
पहले चरण में
नंगेपन से
पाबन्दी हटाई गई
अवाम हक्का-बक्का
शहर बदहवास
निगाहें निगरा की
हवाइयां उड़ी हुई
एक युवक
बाज़ार में दिगम्बर दौड़ा
फ़िर एक तन्वी भी
दफ़न था जो जहन में
हरकत में आने लगा
शर्मीले खुलकर बतियाने लगें
खवातीन गहने की तरह
नंगापन सजाने लगीं
बुजुर्ग ज़माने को
कोसते-खासते
मजा लेने लगें
इसतरह नंगापन
जिस्म पर ही नहीं
रूह में भी पसरता चला गया
अब नंगापन
आम बात है
और जमाना मुकम्मल
तरक्की की राह पर है |
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