मंगलवार, 19 अगस्त 2008

हिम-नद

बरसों के
गिले शिकवे
आँसुओं में
पिघल गये ।
झगड़ने को
लपके थे
नज़रे मिली
और लिपट गये ।

3 टिप्‍पणियां:

Advocate Rashmi saurana ने कहा…

bhut badhiya baat kahi aapne. sundar shabdo me.

बेनामी ने कहा…

छोटी कविता की बड़ी बात निकली!

Rujuta........ ने कहा…

WOW.... NICE LINES UNCLE....



भावनाओं की झील
तैरते शब्द सुमन

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