हृदय कुछ
कमजोर हो गया है ।
पूरी क्षमता से
काम नही करता,
शायद कामचोर हो गया है ।
किडनी भी
ठीक नही रहती,
डॉक्टर की निग़ाह पर है ।
औरत मर्द एक से दिखते,
बच्चे बन्दर गढ लेती है ।
थक सी गई है आँखे,
कुछ का कुछ पढ लेती है ।
इतने कामचोरों संग रह कर,
आत्मावलोकन कर लेता हूँ ।
पछतावे से हर पल बोझल,
अपनी नज़रे भर लेता हूँ ।
मुझे याद आते वह पल,
जब हम केंटीन में सोते थे ।
घंटों खिड़की पर लाईन लगा कर,
लोग किस्मत को रोते थे ।
काम करता मेरे हिस्से का,
लम्हा-लम्हा छीजता था ।
जाने कौन स्वेद कणों से
मेरी तनख़ा सींचता था ।
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